humanity #Mahatma Gandhi

#public issue “hello life” 2020 दुनिया में बढ़ रहे हिंसा,नस्लभेद,अत्यचार, का हम विरोध करते है, और हम बात करगें ऐसे व्यक्त्वि की जिन्होंने मानवता की रक्षा की और हमारी इस दुनिया को और भी सुन्दर बनाया।

19वीं सदी के अन्त में,भारत में जन्मे युग पुरुष महात्मा गाँधी का जन्म 2 oct 1869 ई को गुजरात के एक तटीय शहर पोरबंदर में हुआ था। मोहनदास करमचंद गाँधी को महात्मा की उपाधि गुरुदेव रबिन्द्र नाथ टैगोर ने दी, अपने नागरिक अधिकारों के नेतृत्व के लिये जाने जाते है। वह ब्रिटिश शासित भारत में भारतीय स्वतन्त्रा आंदोलन के नेता थे,हालांकि 1948 में उनकी हत्या कर दी गई,लेकिन शांति को बढ़ावा देने के लिये उनके वर्षों के सविनय अवज्ञा ने martin luthar king, junior और nelson mandela सहित कई अन्य नेताओं को प्रभावित किया।

gandhi teaches us about humanity

“आपको मानवता में विश्वास नही खोना चाहिए। मानवता एक महासागर की तरह है; यदि समुद्र की कुछ बूंदे गंदी है,तो समुद्र गंदा नही होता है।”

“You must not lose faith in humanity. Humanity is like an ocean; if a few drops of the ocean does not become dirty.”

“एक आदमी है,लेकिन उसके विचारों का उत्पाद है। वह जो सोचता है, वह बन जाता है।”

“A man is but the product of his thoughts,what hi thinks, he becomes.”

” मनुष्य के रूप में, हमारी महानता दुनिया को रीमेक करने में सक्षम नहीँ है- जो कि परमाणु युग का मिथक है- जैसा कि खुद को रीमेक करने में सक्षम है।”

As human beings,our greatness lies not so much in being able to remake the world -that is the myth of the atomic age -as in being able to remake ourselves.”

“मैं उसे धार्मिक कहता हूँ जो दूसरों की पीड़ा को समझता है।”

I call him religious who understands the suffering of others.”

“कमजोर कभी माफ नहीं कर सकते। क्षमा ताकतवर की विशेषता है।”

“The weak can never forgive. Forgiveness is the attribute of the strong.”

दक्षिण अफ्रीका में ट्रेन यात्रा

31 मई 1893 को, गांधीजी प्रिटोरिया के रास्ते में थे, एक श्वेत व्यक्ति ने प्रथम श्रेणी की गाड़ी में उनकी उपस्थिति पर आपत्ति जताई, और उन्हें ट्रेन के अंत में वैन के डिब्बे में जाने का आदेश दिया गया। गांधीजी, जिनके पास प्रथम श्रेणी का टिकट था, ने इनकार कर दिया और इसलिए उन्हें पीटरमैरिट्जबर्ग में ट्रेन से फेंक दिया गया। स्टेशन के वेटिंग रूम में सर्दियों की रात से कांपते हुए, बापू ने दक्षिण अफ्रीका में रहने और भारतीयों और अन्य लोगों के खिलाफ नस्लीय भेदभाव से लड़ने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया। उस संघर्ष में से अहिंसक प्रतिरोध का उनका अनूठा संस्करण उभरा, “सत्याग्रह”। आज, गांधीजी की एक कांस्य प्रतिमा सिटी सेंटर में चर्च स्ट्रीट पर स्थित है।

आइंस्टीन ने महात्मा गांधी के बारे में क्या कहा था ?

What did Einstein tell about Gandhi?

“Generations to come, it may well be, will scarce believe that such a man as this one ever in flesh and blood walked upon this Earth”. – Albert Einstein

30 jan, 1948  को जब गांधीजी की हत्या हुई और पूरी दुनिया में शोक की लहर फैल गई, तो आइंस्टीन भी विचलित हुए बिना नहीं रहे थे, 11 feb,1948 को वाशिंगटन में आयोजित एक स्मृति सभा को भेजे संदेश में आइंस्टीन ने कहा, ‘वे सभी  लोग जो मानव जाति के बेहतर भविष्य के लिए चिंतित हैं, वे गांधी की  दुखद मृत्यु से अवश्य ही बहुत अधिक विचलित हुए होंगे.अपने ही सिद्धांत यानि अहिंसा के सिद्धांत का शिकार होकर उनकी मृत्यु हुई. उनकी मृत्यु इसलिये हुई की देश में फैली अव्यवस्था और अशांति के दौर में भी उन्होंने किसी भी तरह की निजी हथियारबंद सुरक्षा लेने से इनकार कर दिया. यह उनका दृढ़ विश्वास था कि बल का प्रयोग अपने आप में एक बुराई है, और जो लोग पूर्ण शांति के लिए प्रयास करते है, उन्हें इसका त्याग करना ही चाहिए. अपनी पूरी जिंदगी उन्होंने अपने इसी विश्वास को समर्पित कर दी और अपने दिल और मन में इसी विश्वास को धारण कर उन्होंने एक महान राष्ट्र को उसकी मुक्ति के मुकाम तक  पहुँचाया. उन्होंने करके दिखाया कि लोगो की निष्ठा सिर्फ राजनीतिक धोखाबाजी और धोखेबाजी के धूर्ततापूर्ण खेल से नहीं जीती जा सकती है, बल्कि वः नैतिक रूप से उत्कृष्ट जीवन का जीवंत उदाहरण बनकर भी हासिल की जा सकती है’.
उन्होंने आगे लिखा, ‘पूरी दुनिया में गांधी के प्रति जो श्रद्धा रखी गई, वह अधिकतर हमारे अवचेतन में दबी इसी स्वीकारोक्ति पर आघारित थी कि नैतिक पतन के हमारे युग में वे अकेले ऐसे स्टेट्समैन थे, जिन्होंने राजनीतिक क्षेत्र में भी मानवीय संबंधों की उच्चस्तरीय संकल्पना का प्रतिनिधित्व किया जिसे हासिल करने की कामना हमें अपनी पूरी शक्ति लगाकर अवश्य ही करनी चाहिए. हमें यह कठिन सबक सिखाना ही चाहिए की मानव जाति का भविष्य सहनीय केवल तभी होगा, जब अन्य सभी मामलों की तरह ही वैश्विक मामलों में भी हमारा कार्य न्याय और कानून पर आधारित होगा, न कि ताकत के खुले आतंक पर, जैसा कि अभी तक सचमुच रहा है.’

#public issue “hello life” 2020 हम बात करते रहेंगे उन महापुरुषों के बारे में जिन्होंने पूरी मानव जाति को एक नई सोच,नई ऊर्जा से भर दिया।

                            #save humanity

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